।। वास्तु में आठ दिशाओं की डिग्री ।।
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
प्राचीन वास्तु ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी को 360 डिग्री में विभाजित किया गया है और इन्हीं डिग्रियों के आधार पर आठ मुख्य दिशाएँ निर्धारित की जाती हैं।
घर, मंदिर, भवन, कार्यालय या किसी भी स्थान का निर्माण करते समय इन दिशाओं की सही पहचान करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
जब भवन का निर्माण सही दिशा और डिग्री के अनुसार किया जाता है तो माना जाता है कि वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जिससे सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।
वास्तु के अनुसार प्रत्येक दिशा किसी न किसी ऊर्जा, तत्व और जीवन के क्षेत्र से जुड़ी होती है। इसलिए घर के अलग-अलग भागों को इन दिशाओं के अनुसार व्यवस्थित करने की सलाह दी जाती है।
1=उत्तर दिशा (North) – 337.5° से 22.5°
उत्तर दिशा को धन और करियर की दिशा माना जाता है। वास्तु शास्त्र में इसे कुबेर की दिशा भी कहा जाता है। इस दिशा को खुला और साफ रखना शुभ माना जाता है। घर या कार्यालय में मुख्य द्वार, खिड़की या खुला स्थान इस दिशा में होना आर्थिक उन्नति के लिए अच्छा माना जाता है। व्यापार और नौकरी में प्रगति के लिए उत्तर दिशा का संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है।
2=उत्तर-पूर्व दिशा (North-East / ईशान) – 22.5° से 67.5°
यह दिशा वास्तु में सबसे पवित्र और शुभ मानी जाती है। इसे ईशान कोण कहा जाता है और यह देवताओं की दिशा मानी जाती है। पूजा कक्ष, ध्यान कक्ष, मंदिर या जल से संबंधित स्थान इस दिशा में बनाना उत्तम माना जाता है। इस दिशा को हमेशा हल्का, साफ और खुला रखना चाहिए। यदि यह दिशा संतुलित रहती है तो घर में आध्यात्मिक ऊर्जा, ज्ञान और सकारात्मकता बढ़ती है।
3=पूर्व दिशा (East) – 67.5° से 112.5°
पूर्व दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है।
यह नई शुरुआत, स्वास्थ्य और तरक्की से जुड़ी होती है।
वास्तु के अनुसार घर में पूर्व दिशा में खिड़की या खुला स्थान होना अच्छा माना जाता है ताकि सुबह की सूर्य किरणें घर में प्रवेश कर सकें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। अध्ययन कक्ष या बच्चों के पढ़ने की जगह भी इस दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
4=दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East / आग्नेय) – 112.5° से 157.5°
इस दिशा को अग्नि तत्व की दिशा कहा जाता है।
इसलिए रसोईघर के लिए यह दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
गैस चूल्हा, ओवन या बिजली से चलने वाले उपकरण इस दिशा में रखना अच्छा माना जाता है। यदि रसोई इस दिशा में होती है तो घर में स्वास्थ्य और ऊर्जा संतुलित रहती है।
5=दक्षिण दिशा (South) – 157.5° से 202.5°
दक्षिण दिशा को यश, प्रतिष्ठा और शक्ति से जुड़ा माना जाता है
। वास्तु के अनुसार इस दिशा में भारी वस्तुएँ रखना उचित माना जाता है
। घर की दीवारें इस दिशा में मजबूत और ऊँची होना अच्छा माना जाता है।
सही संतुलन होने पर यह दिशा व्यक्ति को समाज में सम्मान और स्थिरता प्रदान करने वाली मानी जाती है।
6=दक्षिण-पश्चिम दिशा (South-West / नैऋत्य) – 202.5° से 247.5°
यह दिशा स्थिरता और परिवार की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।
घर के मुखिया का शयनकक्ष इस दिशा में होना सबसे अच्छा माना जाता है।
भारी फर्नीचर, तिजोरी या महत्वपूर्ण दस्तावेज भी इस दिशा में रखे जा सकते हैं। वास्तु के अनुसार यह दिशा मजबूत और स्थिर होनी चाहिए, क्योंकि इससे परिवार में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बनी रहती है।
7=पश्चिम दिशा (West) – 247.5° से 292.5°
पश्चिम दिशा को लाभ और अवसर की दिशा माना जाता है।
इस दिशा में भोजन कक्ष, अध्ययन कक्ष या बैठक कक्ष बनाया जा सकता है।
वास्तु के अनुसार यह दिशा जीवन में नए अवसर और प्रगति के मार्ग खोलने वाली मानी जाती है। यदि यह दिशा संतुलित रहती है तो व्यक्ति को धीरे-धीरे स्थिर सफलता प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है।
8=उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West / वायव्य) – 292.5° से 337.5°
इस दिशा को वायु तत्व की दिशा कहा जाता है। यह दिशा रिश्तों, सामाजिक संपर्क और यात्रा से जुड़ी मानी जाती है। अतिथि कक्ष या गेस्ट रूम इस दिशा में बनाना अच्छा माना जाता है। यदि यह दिशा संतुलित रहती है तो परिवार में संबंध अच्छे रहते हैं और जीवन में गतिशीलता बनी रहती है।
।। दिशाओं की डिग्री का उपयोग कैसे किया जाता है ।।
आज के समय में मोबाइल कम्पास या डिजिटल कम्पास की सहायता से आसानी से किसी भी स्थान की दिशा और डिग्री मापी जा सकती है।
वास्तु विशेषज्ञ घर का नक्शा बनाते समय इन डिग्रियों को ध्यान में रखते हैं ताकि प्रत्येक कमरा सही दिशा में बनाया जा सके।
यदि घर पहले से बना हुआ है तो भी इन दिशाओं के अनुसार कुछ छोटे बदलाव करके ऊर्जा संतुलन बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता है।
इस प्रकार वास्तु शास्त्र के अनुसार आठों दिशाओं की सही डिग्री समझना किसी भी भवन के निर्माण और व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही दिशा का संतुलन घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि लाने में सहायक माना जाता है।
कमेंट करे जय वास्तु देव।
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